अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय का नामकरण करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू
महुआ डाबर संग्रहालय परिवार ने स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय का नाम अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर रखने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। काकोरी एक्शन के शताब्दी वर्ष में ऐतिहासिक सम्मान देने की अपील की गई।
प्रयागराज। महुआ डाबर संग्रहालय परिवार के तत्वावधान में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी एवं काकोरी केस के महानायक अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह को उचित सम्मान दिलाने की मांग को लेकर बुधवार से अनिश्चितकालीन धरना प्रारंभ हो गया है। धरने की प्रमुख मांग है कि रानी नेहरू चिकित्सालय, प्रयागराज का नाम तत्काल प्रभाव से अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर रखा जाए।
महुआ डाबर संग्रहालय के संस्थापक शाह आलम राना के अनुसार देश जब आज़ादी का अमृत काल और ऐतिहासिक काकोरी एक्शन की 100वीं वर्षगांठ मना रहा है, ऐसे में काकोरी कांड के इस शताब्दी वर्ष में ऐतिहासिक भूल को सुधारते हुए इस पूरे अस्पताल का नाम तत्काल ‘अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह अस्पताल’ किया जाना चाहिए।
धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतियोद्धा ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान स्थल को आज भी वह सम्मान नहीं मिल पाया है, जिसके वे वास्तविक हकदार हैं। उन्होंने कहा कि ठाकुर रोशन सिंह केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं थे, बल्कि उनके विचार नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। फांसी से पूर्व तत्कालीन मलाका जेल से लिखे गए उनके पत्र, दुर्लभ चित्र तथा मुकदमे से संबंधित अभिलेख आज भी महुआ डाबर संग्रहालय में सुरक्षित हैं, जो उनके संघर्ष और राष्ट्रभक्ति के जीवंत साक्ष्य हैं।
वक्ताओं ने बताया कि 19 दिसंबर 1927 की प्रातः जब ठाकुर रोशन सिंह को मलाका जेल में फांसी दी गई थी, उस समय हजारों लोग उनका पार्थिव शरीर लेने के लिए जेल के बाहर एकत्र हुए थे। उनकी अंतिम यात्रा के ऐतिहासिक चित्र आज भी उस जनसैलाब और जनभावना की गवाही देते हैं।
महुआ डाबर संग्रहालय परिवार के सदस्यों ने कहा कि जिस ऐतिहासिक मलाका जेल में ठाकुर रोशन सिंह को फांसी दी गई थी, उसी स्थान पर वर्तमान में स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय स्थित है। आजादी के अमृत काल में इस चिकित्सा संस्थान का नाम अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर रखा जाना उनके सर्वोच्च बलिदान का वास्तविक सम्मान होगा।
संग्रहालय परिवार ने यह भी स्पष्ट किया कि वह वर्षों से इस मांग को विभिन्न माध्यमों से उठाता रहा है। काकोरी ट्रेन एक्शन के सौ साल के बाद भी ठाकुर रोशन सिंह को अपेक्षित सम्मान न मिलना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।
धरने में डॉ. शाह आलम राना, डॉ. अवनीश सिंह, प्रियांशु रंजन, निशांत मोदनवाल, हिमांशु सिंह, सम्राट राय, शिवांग त्रिपाठी, रिशुराज आनंद, श्रेयश तोमर, अभिषेक तिवारी, शुभम सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्र एवं युवा उपस्थित रहे।