- विकास का इंजन या अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम?
- दबाव में निवेशक, बढ़ती उधारी, विस्तार की रफ्तार बरकरार; दूरदर्शी सोच या भविष्य की चुनौती?
रितेश सिन्हा
मुंद्रा के एक बंदरगाह से शुरू हुई गौतम अदाणी की कारोबारी यात्रा आज देश के सबसे बड़े कारोबारी साम्राज्यों में गिनी जाती है। बंदरगाह, बिजली, हरित ऊर्जा, हवाई अड्डे, सीमेंट, गैस वितरण, खनन, सड़क निर्माण, आंकड़ा केंद्र और रक्षा जैसे क्षेत्रों में अदाणी समूह की मौजूदगी लगातार बढ़ी है। लेकिन इस विस्तार के साथ एक ऐसा आंकड़ा भी जुड़ा है जिसने वित्तीय जगत, निवेशकों और नीति निर्माताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है। मार्च 2026 तक अदाणी समूह पर लगभग 3.72 लाख करोड़ रुपये का सकल कर्ज़ था।
दूसरी ओर समूह की कुल संपत्तियां 6.77 लाख करोड़ रुपये से अधिक और नकद भंडार लगभग 55,852 करोड़ रुपये बताया गया। यही कारण है कि कुछ लोग इसे भारत के विकास की सबसे बड़ी निजी कहानी मानते हैं, तो कुछ इसे बढ़ते जोखिम के संकेत के रूप में देखते हैं।
पिछले एक दशक में शायद ही कोई दूसरा भारतीय कारोबारी समूह इतनी तेज़ी से आगे बढ़ा हो। जहां कई पुराने उद्योग घराने अपने स्थापित कारोबार को मजबूत करने में लगे रहे, वहीं अदाणी समूह लगातार नए क्षेत्रों में प्रवेश करता गया। बंदरगाहों से शुरू हुई यात्रा बिजली उत्पादन, कोयला खनन, बिजली नेटवर्क, गैस वितरण, हवाई अड्डों, हरित ऊर्जा और सीमेंट उद्योग तक पहुंच गई। आज भारत के आधारभूत ढांचे से जुड़े लगभग हर बड़े क्षेत्र में अदाणी समूह की मौजूदगी दिखाई देती है।
समूह की सबसे मजबूत इकाई अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन मानी जाती है। मार्च 2026 तक इस कंपनी ने लगभग 25,228 करोड़ रुपये की कमाई दर्ज की। देश के समुद्री व्यापार का बड़ा हिस्सा अब इसके बंदरगाहों से होकर गुजरता है। मुंद्रा से लेकर देश के कई प्रमुख बंदरगाहों तक फैला इसका नेटवर्क समूह की वित्तीय ताकत का प्रमुख आधार बन चुका है।
ऊर्जा क्षेत्र में अदाणी पावर ने लगभग 23,321 करोड़ रुपये की कमाई की। देश में बढ़ती बिजली मांग के बीच कंपनी ने अपनी स्थिति मजबूत की है। निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनियों में शामिल अदाणी पावर आज समूह की आय का बड़ा स्रोत है।
हरित ऊर्जा क्षेत्र में अदाणी ग्रीन एनर्जी ने लगभग 12,075 करोड़ रुपये की कमाई दर्ज की। सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में कंपनी का विस्तार दुनिया के सबसे बड़े विस्तार कार्यक्रमों में गिना जाता है। हालांकि इस क्षेत्र में भारी निवेश की आवश्यकता होती है और यही कारण है कि इसके साथ ऋण का आकार भी बढ़ता गया।
अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस ने लगभग 8,726 करोड़ रुपये की कमाई की। बिजली पहुंचाने वाले नेटवर्क और स्मार्ट मीटर परियोजनाओं में कंपनी तेजी से आगे बढ़ रही है। वहीं अदाणी टोटल गैस ने लगभग 1,254 करोड़ रुपये की कमाई दर्ज की और शहरी गैस वितरण के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत की।
समूह की प्रमुख कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज ने लगभग 16,643 करोड़ रुपये की कमाई की। हवाई अड्डे, आंकड़ा केंद्र, सड़क परियोजनाएं, खनन सेवाएं और तांबा शोधन जैसे नए कारोबार इसी कंपनी के माध्यम से विकसित किए जा रहे हैं। दूसरी ओर अंबुजा सीमेंट और एसीसी के माध्यम से सीमेंट कारोबार से लगभग 7,586 करोड़ रुपये की कमाई हुई। कुछ वर्षों पहले तक जहां इस क्षेत्र में समूह की कोई विशेष पहचान नहीं थी, वहीं आज वह देश के सबसे बड़े सीमेंट उत्पादकों में शामिल है।
इन सभी कंपनियों को मिलाकर मार्च 2026 तक अदाणी समूह की कुल कमाई लगभग 94,834 करोड़ रुपये रही। समूह का दावा है कि यही मजबूत कमाई उसके बड़े कर्ज़ को संभालने की क्षमता देती है। लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि 3.72 लाख करोड़ रुपये का कर्ज़ किसी भी निजी भारतीय कारोबारी समूह के लिए असाधारण रूप से बड़ा आंकड़ा है और इसकी लगातार निगरानी की आवश्यकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतना बड़ा कर्ज़ मिला कैसे? इसका उत्तर अदाणी समूह के कारोबार में छिपा है। बंदरगाह, हवाई अड्डे, बिजली संयंत्र, बिजली नेटवर्क, सीमेंट कारखाने और हरित ऊर्जा परियोजनाएं ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें शुरुआत में भारी निवेश की आवश्यकता होती है, लेकिन एक बार स्थापित होने के बाद ये दशकों तक आय देती हैं। इसी आधार पर बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने इन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की। ऋण देने वाले संस्थानों का विश्वास रहा कि इन परिसंपत्तियों से होने वाली भविष्य की आय ऋण चुकाने में सक्षम होगी।
भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, जीवन बीमा निगम, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम जैसी संस्थाएं समूह की विभिन्न परियोजनाओं से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी रही हैं। विदेशी बैंकों और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने भी समय-समय पर समूह की परियोजनाओं में पूंजी लगाई है। यही वजह है कि अदाणी समूह की वित्तीय स्थिति पर चर्चा केवल एक कारोबारी समूह तक सीमित नहीं रहती, बल्कि बैंकिंग और निवेश जगत तक पहुंच जाती है।
यहीं से जोखिम की बहस भी शुरू होती है। यदि किसी एक निजी समूह पर अत्यधिक वित्तीय निर्भरता बढ़ती है तो उसका प्रभाव केवल उस समूह तक सीमित नहीं रहता। बड़ी मात्रा में ऋण देने वाले बैंक, बीमा कंपनियां और वित्तीय संस्थान भी उससे प्रभावित हो सकते हैं। यही कारण है कि समय-समय पर यह सवाल उठता रहा है कि क्या किसी एक निजी समूह का ऋण आकार इतना बड़ा हो जाना चाहिए कि उसके उतार-चढ़ाव का असर व्यापक वित्तीय व्यवस्था तक महसूस किया जाने लगे।
मार्च 2026 तक अदाणी समूह का सकल कर्ज़ 3.72 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका था। यह राशि कई राज्यों के वार्षिक बजट से अधिक है। यदि भविष्य में ब्याज दरें बढ़ती हैं, परियोजनाओं से अपेक्षित आय नहीं आती, वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी आती है या पूंजी बाजार में संकट पैदा होता है, तो बड़े ऋण वाले कारोबारी मॉडल पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में सबसे पहले चिंता उन संस्थानों की बढ़ेगी जिन्होंने समूह को बड़ी मात्रा में वित्तीय सहायता प्रदान की है।
अदाणी मॉडल अन्य बड़े उद्योग घरानों से अलग दिखाई देता है। रिलायंस, टाटा, बिड़ला और अन्य बड़े समूहों ने भी विस्तार किया है, लेकिन अदाणी समूह ने अपेक्षाकृत कम समय में कहीं अधिक आक्रामक निवेश का रास्ता चुना। वित्त वर्ष 2025-26 में ही समूह ने लगभग 1.53 लाख करोड़ रुपये का नया निवेश किया। यही निवेश उसकी तेज़ वृद्धि का आधार बना, लेकिन यही बढ़ते कर्ज़ का प्रमुख कारण भी बना।
सरकारी उपक्रमों के संदर्भ में भी अदाणी समूह का विस्तार महत्वपूर्ण है। बंदरगाह क्षेत्र में जहां कभी सार्वजनिक क्षेत्र का दबदबा था, वहां आज निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत अदाणी पोर्ट्स है। हवाई अड्डों में मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम जैसे महत्वपूर्ण हवाई अड्डों का संचालन समूह के हाथ में है। बिजली, गैस और माल परिवहन जैसे क्षेत्रों में भी उसकी मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। इससे कई क्षेत्रों में सार्वजनिक उपक्रमों के सामने नई प्रतिस्पर्धा खड़ी हुई है।
मार्च 2026 तक उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि अदाणी समूह भारत के सबसे बड़े निजी निवेशकों में से एक बन चुका है। उसके पास 6.77 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां, लगभग 95 हजार करोड़ रुपये की कमाई और 3.72 लाख करोड़ रुपये का कर्ज़ है। यही तीन आंकड़े अदाणी समूह की पूरी कहानी भी कहते हैं—असाधारण विस्तार, विशाल संपत्तियां और अभूतपूर्व ऋण।
आज अदाणी समूह केवल एक कारोबारी घराना नहीं रह गया है। बंदरगाहों से लेकर हवाई अड्डों तक, बिजली से लेकर सीमेंट तक और हरित ऊर्जा से लेकर गैस वितरण तक उसका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। लेकिन जितनी तेजी से साम्राज्य बढ़ा है, उतनी ही तेजी से कर्ज़ का आकार भी बढ़ा है। 3.72 लाख करोड़ रुपये का यह कर्ज़ केवल अदाणी समूह का आंकड़ा नहीं है, बल्कि उन बैंकों, वित्तीय संस्थानों और निवेशकों से भी जुड़ा है जिनका धन इन परियोजनाओं में लगा हुआ है।
समर्थकों के लिए यह भारत के आधारभूत ढांचे के निर्माण की सबसे बड़ी निजी कहानी है। आलोचकों के लिए यह बढ़ती उधारी पर खड़ा एक ऐसा मॉडल है जिसकी असली परीक्षा अभी बाकी है। आने वाले वर्षों में यह तय होगा कि 3.72 लाख करोड़ रुपये के कर्ज़ पर खड़ा यह विशाल कारोबारी साम्राज्य भारत के विकास की सबसे बड़ी सफलता साबित होता है या फिर अत्यधिक ऋण आधारित विस्तार पर नई बहस को जन्म देता है। फिलहाल इतना तय है कि अदाणी समूह की अगली सफलता या अगली चुनौती का असर केवल एक कारोबारी घराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग व्यवस्था और निवेश जगत तक उसकी गूंज सुनाई देगी।
डिस्क्लेमर:
यह लेख रितेश सिन्हा के व्यक्तिगत विचार, विश्लेषण और समसामयिक आर्थिक परिस्थितियों की उनकी समझ पर आधारित है। लेख में व्यक्त मत आवश्यक नहीं कि किसी समाचार संस्था, संगठन या प्रकाशक के आधिकारिक विचार हों। इसमें उल्लिखित तथ्य, टिप्पणियां और विश्लेषण सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध सूचनाओं, सरकारी बयानों तथा मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। लेख का उद्देश्य केवल जनचर्चा और विषय पर विमर्श को बढ़ावा देना है।

