जापान के बाद नेपाल ने भी भारतीय आमों के आयात पर लगाई रोक, लेकिन वैश्विक बाजार में अल्फोंसो और केसर आम की मांग बरकरार
नई दिल्ली। भारतीय आमों के निर्यात को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। जापान द्वारा भारतीय आमों के आयात पर रोक लगाने के बाद अब नेपाल ने भी भारत से आने वाले आमों पर प्रतिबंध लगा दिया है। नेपाल सरकार का कहना है कि कुछ खेपों में निर्धारित सीमा से अधिक कीटनाशकों के अवशेष पाए गए हैं, जिसके चलते खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।
नेपाल के कृषि एवं पशु विकास मंत्रालय के अनुसार, भारत से आयातित आमों और कुछ अन्य फलों की जांच के दौरान कीटनाशकों की मात्रा तय मानकों से अधिक पाई गई। इसके बाद संबंधित उत्पादों के आयात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई।
नेपाली बाजारों में बढ़ी चिंता
नेपाल भारतीय आमों (mango import from india)का एक प्रमुख आयातक देश रहा है। प्रतिबंध लागू होने के बाद वहां के स्थानीय बाजारों में आम की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गर्मियों के मौसम में आम की मांग सबसे अधिक रहती है और आयात रुकने से आपूर्ति प्रभावित होने लगी है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि घरेलू कृषि उत्पादों को बढ़ावा देना स्वागत योग्य कदम है, लेकिन बिना पर्याप्त तैयारी के अचानक लगाया गया प्रतिबंध बाजार में अस्थिरता पैदा कर सकता है। व्यापारियों को आशंका है कि मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ता अंतर कीमतों को भी प्रभावित कर सकता है।
जापान के बाद नेपाल का फैसला
पिछले महीने जापान ने भी गुणवत्ता मानकों का हवाला देते हुए भारतीय आमों के कुछ निर्यात पर रोक लगाई थी। इसके बाद नेपाल का यह कदम भारतीय फल निर्यातकों के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिबंध सीमित बाजारों तक ही प्रभाव डालेगा और भारतीय आमों की वैश्विक लोकप्रियता पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
वैश्विक बाजार में बनी हुई है मांग
नेपाल और जापान द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद भारतीय आमों की अंतरराष्ट्रीय मांग मजबूत बनी हुई है। विशेष रूप से अल्फोंसो और केसर जैसी प्रीमियम किस्मों की यूरोप, उत्तरी अमेरिका और पश्चिम एशिया के देशों में अच्छी मांग है।
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हाल ही में एयर इंडिया ने जानकारी दी थी कि भारत से 1,000 टन से अधिक अल्फोंसो और केसर आम विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात किए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि भारतीय आमों की गुणवत्ता और स्वाद को लेकर वैश्विक उपभोक्ताओं का भरोसा अभी भी कायम है।
आगे की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को निर्यात बाजारों में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण, कीटनाशकों के उपयोग की निगरानी और अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन पर विशेष ध्यान देना होगा। इससे न केवल मौजूदा बाजार सुरक्षित रहेंगे बल्कि नए निर्यात अवसर भी बढ़ेंगे।

