प्रवासी राजस्थानी संवाद कार्यक्रम: ‘पधारो म्हारे देश’ से ‘पधारो थारे देश’ तक, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच मजबूत होगी आर्थिकी और संस्कृति की डोर
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर जयपुर स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ‘प्रवासी राजस्थानी संवाद कार्यक्रम’ ने राजस्थान की आर्थिक प्रगति, सांस्कृतिक विरासत और प्रवासी समुदाय की भागीदारी को नई दिशा देने का संदेश दिया। देश-विदेश में बसे प्रवासी राजस्थानी अपनी मेहनत, उद्यमशीलता और सामाजिक समरसता के बल पर वैश्विक स्तर पर पहचान बना चुके हैं। अब वे अपनी मातृभूमि के विकास में सक्रिय योगदान देने के लिए भी आगे आ रहे हैं।
महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच आर्थिक एवं सांस्कृतिक साझेदारी को नई गति
महाराष्ट्र में लंबे समय से निवास कर रहे राजस्थानी प्रवासी दोनों राज्यों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। मुंबई और पुणे जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में सक्रिय राजस्थानी उद्यमियों के अनुभव, निवेश क्षमता और कारोबारी नेटवर्क से राजस्थान के औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की संभावनाएं हैं।
कार्यक्रम के दौरान मुंबई चैप्टर के प्रतिनिधियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भागीदारी की। इससे यह संदेश सामने आया कि प्रवासी राजस्थानी भौगोलिक दूरी के बावजूद अपनी जड़ों, संस्कृति और मातृभूमि के विकास से जुड़े रहना चाहते हैं।
महाराष्ट्र की आर्थिक क्षमता और राजस्थान में उपलब्ध औद्योगिक, पर्यटन एवं निवेश संभावनाओं का समन्वय ‘विकसित राजस्थान’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
महाराष्ट्र के निवेशकों के लिए राजस्थान में नए अवसर
राजस्थान में औद्योगिक आधारभूत ढांचे के विस्तार, निवेश प्रोत्साहन नीतियों और डिजिटल सुविधाओं के विकास से प्रवासी उद्यमियों के लिए कई क्षेत्रों में संभावनाएं उभर रही हैं।
1. पेट्रोकेमिकल और रिफाइनरी उद्योग
बाड़मेर के पचपदरा में विकसित हो रही रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल परियोजना से जुड़े डाउनस्ट्रीम उद्योगों में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आधारित विनिर्माण इकाइयां, सहायक उद्योग और तकनीकी सेवाएं महाराष्ट्र के उद्यमियों तथा विशेषज्ञों के लिए नए अवसर उपलब्ध करा सकती हैं।![]()
2. मैन्युफैक्चरिंग और एमएसएमई
वस्त्र, इंजीनियरिंग और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों में अनुभव रखने वाले महाराष्ट्र के उद्यमी राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश कर सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
3. हेरिटेज टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी
शेखावाटी क्षेत्र के सीकर, झुंझुनूं और चूरू जिलों में ऐतिहासिक हवेलियों, पारंपरिक स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। हेरिटेज होटल, पर्यटन सुविधाओं और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में निवेश मुंबई और पुणे के निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर बन सकता है।
प्रस्तुत विवरण के अनुसार, आगामी 8 दिसंबर को शेखावाटी हेरिटेज मीट और 10 दिसंबर को प्रवासी राजस्थानी सम्मेलन आयोजित करने की योजना इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।
कारोबार सुगमता के लिए नीतिगत बदलाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में आधारभूत संरचनाओं के विस्तार और कनेक्टिविटी को मजबूत करने के प्रयासों के बीच राजस्थान सरकार भी निवेशकों के लिए कारोबारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर दे रही है।
राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए कई प्रक्रियाओं और सुविधाओं में बदलाव किए जाने की जानकारी दी गई है।
- कन्सेंट-टू-ऑपरेट: उपलब्ध विवरण के मुताबिक, एमएसएमई क्षेत्र में इसकी समय-सीमा 120 दिन से घटाकर 30 दिन और बड़े उद्योगों के लिए 60 दिन की गई है।
- व्हाइट कैटेगरी का विस्तार: कम प्रदूषण वाले उद्योगों की सूची 104 से बढ़ाकर 877 किए जाने का उल्लेख है, जिससे संबंधित श्रेणियों के उद्योगों के लिए नियामकीय प्रक्रियाएं सरल हो सकती हैं।
- राज निवेश पोर्टल: सिंगल विंडो व्यवस्था के अंतर्गत 18 विभागों की लगभग 190 सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।
- निवेश प्रोत्साहन योजनाएं: राजस्थान इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम (RIPS), राजस्थान इंडस्ट्रीज पार्क प्रमोशन पॉलिसी-2026 और एनआरआर पॉलिसी-2025 के माध्यम से निवेशकों को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, प्रत्येक जिले में जिला प्रवासी प्रकोष्ठ गठित करने की पहल को प्रवासी राजस्थानियों और राज्य प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राजस्थान फाउंडेशन के बढ़ते दायरे से प्रवासियों को मिलेगा मंच
प्रवासी राजस्थानियों को अपनी मातृभूमि से जोड़ने में राजस्थान फाउंडेशन की भूमिका भी लगातार विस्तृत हो रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने 11 नए चैप्टर्स की घोषणा की है। इनमें रायपुर, लखनऊ, पटना, सिलीगुड़ी, पणजी, विशाखापट्टनम, सैन फ्रांसिस्को, ज्यूरिख, मिलान, डबलिन और स्टॉकहोम में नॉर्डिक चैप्टर शामिल हैं।
इन नए चैप्टर्स के जुड़ने से देश-विदेश में फाउंडेशन के कुल चैप्टर्स की संख्या 40 से बढ़कर 51 होने की जानकारी दी गई है। यह नेटवर्क प्रवासी राजस्थानियों को निवेश, सांस्कृतिक गतिविधियों, पर्यटन और सामाजिक सहयोग से जुड़ी पहलों के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
‘पधारो म्हारे देश’ से ‘पधारो थारे देश’ तक नई सोच
राजस्थान की पारंपरिक मेहमाननवाजी का प्रतीक ‘पधारो म्हारे देश’ अब प्रवासी राजस्थानियों की सहभागिता के साथ एक व्यापक आर्थिक और सांस्कृतिक साझेदारी का संदेश दे रहा है। ‘पधारो थारे देश’ की भावना इस बात को रेखांकित करती है कि प्रवासी समुदाय केवल अपनी जड़ों से जुड़ा रहना ही नहीं चाहता, बल्कि निवेश, उद्यमिता, पर्यटन और सामाजिक विकास के माध्यम से मातृभूमि की प्रगति में भागीदार भी बनना चाहता है।
महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच मजबूत होते संबंध दोनों राज्यों के लिए निवेश, व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और रोजगार सृजन के नए रास्ते खोल सकते हैं। यदि सरकारी नीतियों, प्रवासी उद्यमियों और स्थानीय उद्योगों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित होता है, तो यह साझेदारी राजस्थान की अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करने में भी योगदान दे सकती है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें उल्लिखित आंकड़ों, नीतिगत प्रावधानों, परियोजनाओं और आगामी कार्यक्रमों की स्वतंत्र पुष्टि प्रकाशन द्वारा नहीं की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि संबंधित आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करें।