भारत के पहले कॉरपोरेट सोशल रिटर्न्स आर्किटेक्ट्स का शुभारंभ
नई दिल्ली: सरकार, कॉरपोरेट और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में एक नई पहल के रूप में हाउस ऑफ तर्क का औपचारिक शुभारंभ नई दिल्ली में किया गया। यह मंच रेगुलेटर, एनजीओ और नेतृत्व स्तर के निर्णयकर्ताओं को एक साथ लाकर कार्य करता है और सरकार व जमीनी स्तर के संगठनों के बीच सेतु की भूमिका निभा रहा है।
शुभारंभ अवसर पर कॉरपोरेट, सामाजिक और संस्थागत क्षेत्रों से जुड़े कई वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया और सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) से जुड़े अनुभव व सुझाव साझा किए।
इस अवसर पर हाउस ऑफ तर्क के को-फाउंडर मनोविराज सिंह ने कहा कि वे पिछले लगभग पाँच वर्षों से सीएसआर के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं और इससे जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों को गहराई से समझते हैं। इन्हीं चुनौतियों के समाधान के उद्देश्य से पाँच महीने पहले तर्क की स्थापना की गई।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में तर्क देश के 15 राज्यों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है, जहाँ संस्थाओं के कार्यों को बेहतर ढंग से डिजाइन करने और प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि लाभार्थियों तक सीएसआर का वास्तविक लाभ पहुँच सके और फंड का सही उपयोग हो।
मनोविराज सिंह ने कहा कि तर्क सीएसआर पोर्टफोलियो में स्पष्टता लाने पर जोर देता है, जिससे सुदृढ़ फ्रेमवर्क के माध्यम से बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें। संस्था इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, जन-जागरूकता, शिक्षा, पर्यावरण सहित विभिन्न क्षेत्रों में परियोजनाओं का डिजाइन और समन्वय करती है।
उन्होंने यह भी कहा कि वरिष्ठ नेतृत्व और नीति निर्माताओं से सहयोग मिलने के कारण नियम-कानूनों के अनुरूप सीएसआर परियोजनाओं को सुगमता से लागू किया जा रहा है, जिससे जमीनी स्तर के एनजीओ को मुख्यधारा से जोड़ा जा सका है।
वहीं हाउस ऑफ तर्क की को-फाउंडर लक्षणा अस्थाना ने कहा कि आज सीएसआर फंड की कमी नहीं है, लेकिन उसकी सही दिशा में उपयोग सबसे बड़ी चुनौती है। विभिन्न सिस्टम्स के बीच संवाद की कमी के कारण सामाजिक रिटर्न्स प्रभावित होते हैं। तर्क इसी अंतर को पाटने का कार्य कर रहा है।
लक्षणा अस्थाना ने बताया कि मात्र चार महीनों में संस्था 45 सहयोगी संगठनों के साथ कार्य कर रही है और भविष्य में इसका विस्तार सभी राज्यों में किया जाएगा। साथ ही टीम को भी मजबूत किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि तर्क का उद्देश्य सीएसआर को विश्वसनीय और दीर्घकालिक सामाजिक उद्देश्यों से जोड़ना है, ताकि इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचे।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2014 के बाद सीएसआर गतिविधियों में तेज़ी आई है और 2026 को ध्यान में रखते हुए इसकी प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए नई दिल्ली में रेगुलेटर और संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें आपसी संवाद के माध्यम से आगे की कार्ययोजना तय की गई।







