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बदल रहा है बिहार : नितिन नवीन के नेतृत्व में तरक्की की नई राह

On: Tuesday, September 9, 2025 8:36 AM
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पटना : कभी बिहार की पहचान टूटी-फूटी सड़कों और कच्ची गलियों से होती थी। लंबी यात्राएँ थकान और परेशानी से भरी रहती थीं। लेकिन वक्त बदला। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सोच और पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन के नेतृत्व ने बिहार की तस्वीर ही बदल दी। आज वही बिहार चौड़ी सड़कों, आधुनिक एक्सप्रेस-वे और गगनचुंबी पुलों से नई पहचान बना रहा है।

नितिन नवीन का मानना है – सड़क सिर्फ सफर का जरिया नहीं, ये तरक्की की धड़कन है।

चुनौतियों से सफलता तक

नितिन नवीन ने जब पथ निर्माण विभाग की जिम्मेदारी संभाली तो सामने कई चुनौतियाँ थीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। गाँव-गाँव तक पक्की सड़कें पहुँचीं। शहरों को जोड़ने वाले फोरलेन और सिक्सलेन हाईवे बने। और आज बिहार के एक्सप्रेस-वे पर दौड़ती गाड़ियाँ इस बदलाव की गवाही देती हैं।

आंकड़े बताते हैं विकास की कहानी

  • साल 2005 में बिहार की प्रति व्यक्ति आय थी सिर्फ ₹8,223।
  • 2025 में यह बढ़कर ₹66,828 हो गई।
  • यानी 700% से ज्यादा की वृद्धि।

यह साबित करता है कि सड़कें और पुल सिर्फ ढांचा नहीं, बल्कि कारोबार, रोज़गार और समृद्धि की नई ताकत बने हैं।

गाँवों को जोड़ती सड़कें

मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत हज़ारों गाँव मुख्य सड़कों से जुड़े। किसानों को बाजार तक पहुँच आसान हुई, उद्योगों को गति मिली, पर्यटन बढ़ा और आम लोगों का सफर सुगम हो गया।

पहले पटना पहुँचने में छह घंटे लगते थे, अब वही यात्रा सिर्फ पाँच घंटे में पूरी होती है।

एक्सप्रेस-वे की नई पहचान

बिहार अब देश के सबसे बड़े एक्सप्रेस-वे नेटवर्क का हिस्सा बन रहा है।

  • 408 किमी : रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे
  • 416 किमी : गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे
  • 250 किमी : पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे
  • 300 किमी : बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे
  • 161 किमी : वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे

ये एक्सप्रेस-वे सिर्फ नक्शे पर लाइनें नहीं, बल्कि बिहार के सपनों को जोड़ने वाली जीवन-रेखाएं हैं।

नेशनल और स्टेट हाईवे का विस्तार

  • नेशनल हाइवे : 3,410 किमी से बढ़कर 6,147 किमी
  • स्टेट हाइवे : 1,200 किमी का इजाफा
  • बड़ी जिला सड़कें : 7,700 किमी से 16,000 किमी
  • ग्रामीण सड़कें : 800 किमी (2001) से बढ़कर 1.17 लाख किमी

पुलों से बदलती पहचान

गंगा, सोन और कोसी जैसी नदियाँ अब बाधा नहीं, बल्कि विकास की राह बन रही हैं।

  • गंगा पर नए 11 बड़े पुल
  • पटना जिले में 6 बड़े प्रोजेक्ट (औंटा-सिमरिया, दिघवारा-शेरपुर, गांधी सेतु समानांतर पुल आदि)
  • सोन नदी पर जल्द होंगे 7 बड़े पुल

निष्कर्ष

आज बिहार की सड़कें और पुल सिर्फ डामर और कंक्रीट नहीं, बल्कि लोगों की उम्मीदें और सपनों की डोर हैं। नितिन नवीन ने साबित कर दिया है कि बिहार अब किसी से पीछे नहीं। यह नया बिहार अपने दम पर आगे बढ़ रहा है और आने वाला कल और भी रोशन होगा।

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